August 10, 2022

उप्र के व्यापारियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी राहत

Big relief of Allahabad High Court to the traders of UP
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जीएसटी ट्रैन जमा करने व टैक्स क्रेडिट लेने का मिला मौका

जीएसटी प्राधिकारियों को व्यापारियों को एक अवसर देने का निर्देश

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के व्यापारियों को बड़ी राहत दी है। इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जीएसटी ट्रैन 1 व 2 जमा करने में नाकाम रहे सभी जीएसटी पंजीकृत व्यापारियों को 8 सप्ताह के भीतर अपने क्षेत्रीय टैक्स विभाग से सम्पर्क करने की छूट दी है। कोर्ट ने हाईकोर्ट की शरण में आये सभी याचियों को जीएसटी ट्रैन 1 व 2 इलेक्ट्रॉनिकली जमा करने का उचित अवसर देने का निर्देश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति नाहिद आरा मुनीस तथा न्यायमूर्ति एस.डी सिंह की खंडपीठ ने मेसर्स रेटेक फियोन फ्रिक्शन टेक्नोलॉजी सहित सैकड़ों याचिकाओं को स्वीकार करते हुए दिया है।

कोर्ट ने कहा है कि सभी याचियों को चार हफ्ते में अपने क्षेत्रीय प्राधिकारियों के समक्ष ट्रैन 1 व 2 व्यक्तिगत रूप से जमा करने की अनुमति दी जाय। और कोर्ट ने टैक्स विभाग को जीएसटी कानून की धारा 140 व नियम 117 का अनुपालन कर दो हफ्ते में रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है तथा कहा है कि इस रिपोर्ट पर दो हफ्ते में अनापत्ति ली जाय। आपत्ति दाखिल करने का भी सीमित अवसर दिया जाय।

हाईकोर्ट ने कहा कि यह प्रक्रिया तीन हफ्ते में पूरी कर ली जाय और सभी प्राधिकारी एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट जीएसटी नेटवर्क को प्रेषित करें। कोर्ट ने कहा है कि कोई भी फार्म समय सीमा बीतने के आधार पर अस्वीकार न किया जाय। यह भी कहा कि यह कार्यवाही पूरी होने के बाद जीएसटी नेटवर्क अपलोड करें या सभी याचियों को दो हफ्ते में ट्रैन 1 व 2 अपलोड करने का अवसर प्रदान करें। यह कार्यवाही केवल एक बार के लिए ही की जायेगी। यह विवाद को खत्म करने का समय दिया गया है। ताकि मुकद्दमेबाजी से निजात मिल सके।

याचिका में उठाए गये अन्य बिंदुओं पर विचार न करते हुए कोर्ट ने तकनीकी खामियों के चलते टैक्स इनपुट जमा न कर पाने वाले कर दाता पंजीकृत व्यापारियों को विवादों के खात्मे का अवसर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि जीएसटी कानून की शर्तों के अधीन व्यापारियों को टैक्स क्रेडिट लेने का अधिकार है। टैक्स प्राधिकारियों को पंजीकृत कर दाताओं को अपने इस अधिकार का इस्तेमाल करने की अनुमति देनी चाहिए। इन्हें अपना दावा करने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि जीएसटी पोर्टल राज्य प्राधिकारियों की देन है। उनकी वैधानिक जिम्मेदारी है कि पोर्टल ठीक से काम करें।बाधित, अनियमित पोर्टल के संचालन का खामियाजा टैक्स पेयर को भुगतने के लिए विवश नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि सीबीआईसी ने पोर्टल पर टेक्निकल ग्लिचेज को स्वीकार किया है। टाइमलाइन तय किया और टाइमलाइन की छूट भी दी। जिससे टैक्स पेयर को परेशानी उठानी पड़ी। यह समझ से परे है और अब कर दाताओं से अपनी विफलताओं के बावजूद अपलोड करने के प्रयास के साक्ष्य मांगे जा रहे हैं। इसे उचित नहीं माना जा सकता। यह मनमाना व अतार्किक है। कोर्ट ने कहा कि कानून में साक्ष्य देने का उपबंध भी नहीं है। 3 अप्रैल 18 को सर्कुलर जारी कर टैक्स इनपुट जमा करने के प्रयास के सबूत मांगना मनमानापन है व लागू होने योग्य नहीं है।

टैक्स क्रेडिट की बाधाएं दूर करने की जिम्मेदारी सीबीआईसी की है। व्यापारियों को इलेक्ट्रॉनिकली जीएसटी ट्रैन जमाकर आईटीसी पाने का अधिकार है। इस अधिकार से उन्हें वंचित नहीं किया जा सकता।

हिन्दुस्थान समाचार

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