बीते 26 जुलाई से बकस्वाहा जंगलों की सुरक्षा व आदिम संस्कृति के संरक्षण की मांग पर यह साइकिल यात्रा चल रही थी।

करीब दो दर्जन पर्यावरण प्रेमी विभिन्न स्थानों से जुटकर इसको आयोजित किये थे।

पर्यावरण प्रेमियों का कहीं रोली,फूलमाला से स्वागत हुआ तो काले झंडे मिले।

राजनीति ने बड़ामलहरा के क्षेत्रीय विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी के बजरिये इस मुद्दे को पेचीदा बना दिया हैं।

एनजीटी व जबलपुर हाईकोर्ट ने पेड़ो व शैलचित्रों का संज्ञान लेकर याचिका पर सुनवाई की हैं।

शैलचित्रों पर आर्कियोलॉजी आफ इंडिया ने सर्वेक्षण किया जिस पर साइकिल यात्रियों ने असंतोष व्यक्त किया है।

आदिम सभ्यता के 25 हजार साल पुराने शैलचित्रों को बचाने की मुहिम आज वैश्विक मुद्दा बन चुकी हैं।

छतरपुर/बाँदा। मध्यप्रदेश के छतरपुर में निमानी वनरेंज की सरहद पर आने वाला बकस्वाहा का जंगल रोज चर्चा में है। यहां प्रतिदिन हीरा उत्खनन प्रोजेक्ट का विरोध हो रहा हैं। वहीं पर्यावरण संरक्षण को बाशिंदों ने अलग-अलग अभियान चला रखे हैं। सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह मुद्दा आज ग्लोबल हो चुका है। वहीं स्थानीय स्तर पर भी लोगों का जुड़ाव इस आंदोलन से हो रहा है। आन्दोलनकर्मियों के साथ खड़े कुछ लोग न्यायिक स्तर पर भी यह लड़ाई लड़ रहे है। एनजीटी व जबलपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका से कानूनी लड़ाई भी शुरू है।

The five-day cycle tour of Bakswaha Jungle Bachao Andolan concluded with plantation

इधर स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता मुद्दे में गर्माहट के लिए कुछ न कुछ कर रहे है। इसी कड़ी में बीते 26 जुलाई से 30 जुलाई तक पांच दिवसीय साइकिल यात्रा का समापन हुआ है। गौरतलब हैं कि बकस्वाहा जंगल बचाओ आंदोलन के सौजन्य से छतरपुर के युवा सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर व भोपाल से शरद कुमरे की जोड़ी ने साइकिल यात्रा का आयोजन किया है। इस साइकिल यात्रा को पांच दिन छतरपुर से बकस्वाहा तक ले जाया गया। उल्लेखनीय हैं साइकिल यात्रियों का जहां जागरूक लोगों ने फूलमाला से स्वागत किया वहीं हीरा उत्खनन कम्पनी के बिचौलियों ने रंग में भंग डालने को कुछ अराजक तत्वों से काले झंडे भी दिखवाने का कार्य किया है। बावजूद इसके पर्यावरण प्रेमियों के हौसलों में कमी नहीं आ रही हैं।

The five-day cycle tour of Bakswaha Jungle Bachao Andolan concluded with plantation

साइकिल यात्रा में शामिल नेतृत्वकर्ता अमित भटनागर बतलाते है कि साइकिल यात्रा में दूरस्थ क्षेत्र से कई पर्यावरण प्रेमी इस साइकिल यात्रा के सहभागी बने हैं। कोविड19 की सख्ती व छतरपुर कलेक्टर और पुलिस का सहयोग नहीं मिलने के बावजूद लोगों ने जहां विरोध का सामना किया वहीं बकस्वाहा के रहवासियों ने हमें बढ़कर स्वागत भी किया है। अमित ने बताया कि राजेश यादव, चंदन यादव, नीशू मालवीय,बीनू बघेल,सुनीता कलमे,आयुष रावत सहित तमाम युवा आदिवासियों ने साइकिल यात्रा में पांच दिन श्रमदान किया।

The five-day cycle tour of Bakswaha Jungle Bachao Andolan concluded with plantation

यात्रा के दौरान हम छतरपुर से बड़ामलहरा फिर भीमकुण्ड और निमानी होते हुए बक्स्वाहा जंगलों की तरफ बसे गांवों तक पहुंचे है। गांव में लोगों को इस मसले पर जागरूक किया वहीं आगे की रणनीति पर चर्चा की हैं। हमारी मांग हैं कि हमने शैलचित्रों के कुछ नए स्थानों को खोजा हैं जिन्हें एएसआई की टीम ने सर्वेक्षण में शामिल नहीं किया है। आर्कियोलॉजी विभाग सिर्फ औपचारिक सर्वेक्षण से हाईकोर्ट के निर्देश का अनुपालन कोर्ट के भय से कर रही हैं। वास्तव में वे यह काम हीरा उत्खनन परियोजना बन्दर प्रोजेक्ट के टेंडर निकालने से पहले करते तो बात तर्क संगत लगती। जंगलों में हीरा खनन का 50 साल के लिए लीज कर दिया गया और एएसआई को यह जानकारी नहीं हैं कि यहां शैलचित्र विद्यमान हैं।

The five-day cycle tour of Bakswaha Jungle Bachao Andolan concluded with plantation

सवाल यह कि तब जीआईएस ने सेटलाइट से कैसा सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार कर मध्यप्रदेश सरकार को दिया था ? गूढ़ बात यह हैं कि शिवराज सिंह की सरकार ने तीन बड़ी रिपोर्ट दबाकर यह लीज आदित्य बिड़ला ग्रुप की एस्सेल माइनिंग इंड्रस्टीज एंड प्राइवेट लिमिटेड को सौंपी हैं। साइकिल यात्रा का समापन पौधरोपण व काले झंडे दिखाने वाले लोगों के बीच समन्वय स्थापित करके संवाद से किया गया हैं।

रिपोर्ट आशीष सागर दीक्षित

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Sumit Upadhyay

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