स्थानांतरण होने के बावजूद भी खनिज विभाग की सन्नो देवी नहीं की गई कार्यमुक्त।

बीते 10 जुलाई 2021 को बाँदा से प्रयागराज के लिए हुआ था स्थानांतरण।

इसी वर्ष दूसरी बार हुआ स्थानांतरण।

सन्नो देवी नही छोड़ पा रही बाँदा खनिज विभाग में लालसोने का मायाजाल।

यूपी बुंदेलखंड का बाँदा वर्ष के 9 माह मौरम उत्खनन से सुर्खियों में रहता हैं। वहीं जनपद में होने वाले खनन व्यवसाय से वैध की आड़ में अवैध कार्यों की कालिख बाँदा खनिज विभाग को संदिग्ध भूमिका में रखती है। अवैध खनन के हब मण्डल के बाँदा खनिज विभाग कार्यालय से जुड़ी मौरम खदानों में खनिज निदेशक को खुद आकर कार्यवाही करनी पड़ती है। प्रदेश सरकार को करोड़ों का राजस्व का चूना भी इसलिए लगता है। शायद यही कारण रहा कि बीते दिनों जनपद के कथित ईमानदार खनिज अधिकारी सुभाष सिंह को निलंबित कर दिया गया था। वहीं बीते कई साल से बाँदा खनिज विभाग में कई सालों से पैर जमाए बैठी मोहर्रिर सन्नो देवी का स्थानांतरण भी कर दिया गया था।

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सूत्रों से प्राप्त जानकारी मुताबिक खनिज मोहर्रिर सन्नो देवी ने अभी तक जनपद के खनिज विभाग की कुर्सी नहीं छोड़ी है। सरकार किसी की भी रहे खनिज मोहर्रिर सन्नो देवी का रसूख विभाग में कम नहीं होता हैं। गौरतलब सन्नो देवी का स्थानांतरण खनिज निदेशक रोशन जैकब ने 10 जुलाई 2021 को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त करते हुए प्रयागराज के लिए किया था।

Mineral Moharrir Banda Sanno Devi is not getting rid of the illusion of red gold

आपको बताते चले कि इसी वर्ष बीते कुछ महीनों पहले भी खनिज निदेशक ने सन्नो देवी का ट्रांसफर किया था पर सन्नो देवी तीन महीने में ही कौशाम्बी से फिर वापस बाँदा आ गईं थी। अब सवाल यह उठता है कि आखिर क्या वजह हैं कि बाँदा से सन्नो देवी का मोहभंग नहीं होता हैं ? वहीं जनपद के उच्च अधिकारी से लखनऊ तक बैठे लोग इस मामले सवालों के कटघरे में है। सवाल यह कि बाँदा प्रशासन / खनिज विभाग बाँदा में खान निदेशक के आदेशों का कोई असर नही पड़ता हैं या जुगाड़ तंत्र की व्यवस्था में लाल सोने का मायाजाल इतना मजबूत है कि भाजपा सरकार में भी हुक्मरानों की मनमानी का राज चलता है जो पिछली यूपी सरकारों में भी रहा है।

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सूत्र कहते है कि बाँदा खनिज विभाग दलालों का अड्डा बना हुआ है । प्रदेश के माहिर अधिकारी और खनिज विभाग से जुड़े कर्मचारी बाँदा ही भेजे जाते हैं। सूत्र कहते हैं कि बाँदा में इस विभाग की महत्वपूर्ण कुर्सियों में संविदा कर्मचारियों का राज है । कुछ तो ऐसे है जिनका कोई लेखाजोखा भी नही है। वहीं सिर्फ पकड़ी गई गाड़ियों को कम पैसों में छुड़ाने की दलाली भी होती हैं।

बावजूद जानकार होते हुए भी उच्च अधिकारियों की नजर वंहा तक नही पहुंच रही है। यही वजह है कि बाँदा का खनिज विभाग हमेशा सवालों के घेरे में रहता है। वहीं मोहर्रिर सन्नो देवी जैसे कार्मिक ट्रांसफर होकर भी अंगद की तर्ज पर पैर जमाये रहते है। आगामी अक्टूबर माह से यह कारोबार शुरू होना है लेकिन बारिश की सूरत से कई खनन ठेकेदारों के माथे पर मौरम को लेकर चिंता की लकीरें हैं।

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खनिज निरीक्षक जितेंद्र सिंह ने बाँदा छोड़ा
हमीरपुर से विवादों के घेरे छोड़कर बाँदा आये खनिज इंस्पेक्टर / निरीक्षक जितेंद्र सिंह बाँदा से महोबा चले गए है। यह बीते मौरम सत्र में ही बाँदा आये थे तब हमीरपुर में बेरी ग्रामपंचायत के आसपास अवैध खनन का मामला तूल पकड़ने पर जितेंद्र सिंह बाँदा आये थे। सन्नो देवी बाँदा खनिज विभाग कब छोड़ेगी यह गौर करने वाली बात होगी।

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