अमित भटनागर के नेतृत्व में आदिवासी युवाओं का जत्था बीते 26 जुलाई से इस साइकिल यात्रा पर निकला था।

बिहार के मुजफ्फरपुर (पटना) से बीएचयू के छात्र सिद्धार्थ झा भी बक्स्वाहा तक साइकिल यात्रा पर निकले है।

एएसआई ने हाईकोर्ट के आदेश पर आर्कियोलॉजी बक्स्वाहा साइट का सर्वेक्षण किया जिससे लोग संतुष्ट नहीं हैं।

आन्दोलनकर्मियों की मांग इस विशाल जंगल और बिजावर क्षेत्र के आसपास गुप्त व पुरातत्व विभाग की जानकारी में जो शैलचित्रों के स्थान हैं वहां भी सर्वेक्षण किया जाए।

हीरा उत्खनन से 2.15 लाख पेड़ों की कुर्बानी और शैलचित्रों की अनदेखी को रोकने के लिए साइकिल यात्रा निकाली जा रही हैं।

साइकिल यात्रा रोकने को निमानी वनरेंज के मंझौटा तिगड्डा पर कुछ अराजक तत्वों का जमावड़ा।

बाँदा। छतरपुर के बड़ामलहरा विधानसभा क्षेत्र में बक्स्वाहा जंगल बचाने को देशभर में अपने तरीक़े से मुहिम चल रही हैं। वहीं हाल ही में इन जंगलों में करीब 25 हजार साल पुराने आदिम संस्कृति के शैलचित्रों की जानकारी मिलने से इस आंदोलन में अपने तरह का टर्निंग प्वाइंट आ गया हैं। उधर एनजीटी के जंगल कटान पर रोक लगाने के बाद जबलपुर हाईकोर्ट ने भी देश के आर्कियोलॉजी विभाग व मध्यप्रदेश सरकार से शैलचित्रों की रपट तलब कर ली हैं। बीते सप्ताह एएसआई ने भोपाल सर्किल व याचिकाकर्ता पीजी नाज पांडेय के अधिवक्ता को यह सर्वे रिपोर्ट सौंप दी थी।

Five-day cycle tour of Bakswaha Jungle Save Andolan reached Bhimkund

वहीं आर्कियोलॉजी विभाग की इस आनन-फानन सर्वेक्षण रिपोर्ट पर बक्स्वाहा जंगल बचाओ आंदोलन से जुड़े लोगों ने सवाल खड़े किए है। उन्होंने बकस्वाहा जंगल के दूसरे स्थानों पर भी आदिम शैलचित्रों के मिलने का दावा किया है। गौरतलब यह हैं कि बक्स्वाहा जंगलों के शैलचित्रों में आग की खोज अर्थात प्री-हिस्टोरिक शैलचित्र की पुष्टि खुद एएसआई ने की हैं। वहीं 25 हजार साल पुरानी इस सभ्यता के विलुप्ति की बात भी कही हैं। बड़ी बात है मध्यप्रदेश सरकार ने तीन बड़ी गोपनीय रिपोर्ट को दबाते हुए बक्स्वाहा के जंगल में हीरा उत्खनन का टेंडर किया। यह टेंडर बिड़ला ग्रुप के एस्सेल माइनिंग इंड्रस्टीज लिमिटेड को 50 वर्ष के लिए मिला है। इस लीज के घोषणा होने से अब तक लगातार लोग व पर्यावरण कार्यकर्ता बक्स्वाहा जंगल बचाने को एकजुट हुए है। उधर यह मामला अब उच्च न्यायालय व एनजीटी में लंबित हैं।

Five-day cycle tour of Bakswaha Jungle Save Andolan reached Bhimkund

पांच दिवसीय साइकिल यात्रा
बक्सवाहा के जंगलों को बचाने और बक्सवाहा जंगलों में मिले पाषाण कालीन शैलचित्रों को तुरंत संरक्षित करके इन्हें विश्व हेरिटेज धरोहर घोषित कराने के लिए लिए 26 जुलाई से 30 जुलाई पांच दिवसीय साईकिल यात्रा निकाली जा रही है। वहीं मुजफ्फरपुर से बक्स्वाहा तक सिद्धार्थ झा भी साइकिल यात्रा पर निकले है। इस साइकिल यात्रा से हीरा उत्खनन कम्पनी के गुर्गे व स्थानीय सरपंच के चहेते और बड़ामलहरा विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी के कारखास सकते में हैं। बकस्वाहा जंगल बचाओ आंदोलन के अगुआ व साइकिल यात्रा के नेतृत्वकर्ता अमित भटनागर के मुताबिक आज तीसरे दिन हमारी साइकिल यात्रा हीरा खनन प्रभावित गांवों में प्रवेश कर रही है।

वहीं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष घटनाओं की साज़िश में हीरा उत्खनन कम्पनी के बिचौलिए / शरारती तत्वों द्वारा किसी अप्रत्याशित घटना की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता हैं। बकस्वाहा जंगल वनरेंज निमानी के मंझौटा तिगड्डा में लोग साइकिल यात्रा रोकने के लिए खड़े हैं। अमित भटनागर ने छतरपुर पुलिस अधिकारियों व कलेक्टर को इसकी जानकारी दी हैं। साइकिल यात्रा में शामिल युवाओं में हौसला व पर्यावरण प्रेमियों में जोश की तारतम्यता से फिलहाल वक्त बक्स्वाहा जंगल बचाओ आंदोलन गतिशीलता में है। देखना यह होगा छतरपुर प्रशासन व मध्यप्रदेश सरकार आन्दोलनकर्मियों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाता हैं तब जबकि यह मामला न्यायालय में विचाराधीन हैं।

रिपोर्ट आशीष सागर दीक्षित

About Author

admin

You cannot copy content of this page