आज एक जुलाई से शुरू हुई यह पदयात्रा बुंदेलखंड के युवाओं की एकजुटता का प्रतीक हैं।

बकस्वाहा जंगलों को बचाने की मुहिम में दमोह तहसील परिसर से बकस्वाहा तक युवाओं ने पदयात्रा शुरू की हैं।

हाथों में तिरंगा लिए युवा अपने लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ रहे है। दमोह से सुहानियो,दृगपाल सिंह मोदी,सचिन लोदी,संकल्प जैन सहित अन्य युवाओं की टीम इस पदयात्रा में है।

3 जुलाई को बकस्वाहा पहुंचेगी यह पदयात्रा। वहीं होगा जन संवाद।

छतरपुर में अमित भटनागर, शरद कुमरे आदि की टीम पहले ही गांव गांव संवाद की प्रक्रिया में जुटी हैं।

पन्ना बख्तरी में आदिवासी वनवासी क्रांति सेना आंदोलन की रणनीति तैयार कर रही हैं।

दमोह। मध्यप्रदेश बुंदेलखंड के छतरपुर बकस्वाहा जंगल का मसला लगातार गर्म हो रहा है। यूपी-एमपी बुंदेलखंड में आसाढ़ के महीने में तपती धूप के बीच युवाओं ने पदयात्रा शुरू की हैं। गौरतलब हैं दमोह के तहसील परिसर में आज सुबह एकत्र होकर युवाओं का हुजूम बकस्वाहा के लिए कूच कर चुका है। देशभक्ति के गीतों से लबरेज युवाओं के मार्गदर्शन को स्थानीय बुजुर्ग व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आशीर्वाद देकर कर्मपथ पर बढ़ने का हौसला दिया। वहीं जगह-जगह युवाओं की टोली लोगों को नारे व स्लोगन, वार्ता से पर्यावरण और पेड़ संरक्षण की अलख जगाने में जुटी हैं।

युवाओं ने हाल ही में कोरोना काल के आक्सीजन की कीमतों का मूल्यांकन करने की बात कही और सरकार के बन्दर प्रोजेक्ट हीरा उत्खनन से बकस्वाहा के 2 लाख 15 हजार पेड़ों की कटान फैसले का प्रतिरोध शुरू किया हैं। उन्होंने कहा कि जंगलों में आदिवासी संस्कृति के शैलचित्रों का मिलना दर्शाता हैं कि यह जंगल हीरा से अधिक कीमती व देश की धरोहर हैं। सरकार से युवाओं की मांग हैं कि बकस्वाहा के आदिम शैलचित्रों को विश्व आर्कियोलॉजी धरोहरों में शामिल करने प्रस्ताव भेजे व यह हीरा उत्खनन परियोजना निरस्त करें। देखना यह होगा इस आंदोलन की दिशा व दशा आगे कैसी रणनीति अपनाती हैं जिससे युवाओं का लक्ष्य मुकम्मल होगा।

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