पिछले एक साल से कनवारा-अछरौड़ मार्ग पर यूपीडा ने परिवहन निकासी को पुल बना रखा है।

पुल के रस्ते पर लगे बोर्ड में लिखा है ‘ यह मार्ग सिर्फ बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे परिवहन निकासी को हैं।

कनवारा,अछरौड़,मरौली मार्ग के ट्रांसपोर्ट इसी रास्ते से आवाजाही करते हैं।

क्या सुप्रीम कोर्ट,एनजीटी व उच्च न्यायालय ने बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे निर्माण के वक्त ऐसा करने की स्वीकृति प्रदान की हैं ?

पर्यावरण को धता बतलाकर इस एक्सप्रेस वे निर्माण में 1 लाख 90 हजार पेड़ काटे गए है। दावा हैं कि कार्यदाई संस्था ने वनविभाग को दुगुने पेड़ लगाने को ज़मीन व धनराशि दी हैं।

20 लाख ग्रामीण व करीब 2 लाख से ज्यादा की शहरी आबादी में पेयजलापूर्ति की लाइफलाइन केन नदी पर ऐसा पुल क्या विधिक रूप से न्यायसंगत हैं ?

यही अवैध पुल यदि किसी खदान संचालक ने मौरम खनन के लिए बनाया होता तो उस पर कार्यवाही करते है न जिलाधिकारी व खान अधिकारी तब यूपीडा का यह पुल वैध कैसे है ?

बाँदा। चित्रकूट मण्डल के बाँदा शहर से लगी केन नदी जहां मौरम ठेकेदारी से बेदम हैं। माफियाओं के द्वारा वहीं खपटिहा कला 100/3,100/1 में केन नदी की छाती पर अवैध पुल बनाया गया हैं। क्षेत्र के एसडीएम रामकुमार चुप हैं। हाल ऐसा है कि माफियाओं के प्रतिरोध में की गई शिकायत और ज्ञापन की खबर सबसे पहले उन्ही को होती हैं। प्रशासन की कार्यवाही हो या नहीं यह अलग बात है।

UPDA, the executive body of Bundelkhand Expressway, built a bridge over the Ken river stream
बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे की कार्यदायी संस्था यूपीडा ने केन नदी की जलधारा पर बनाया पुल

गौरतलब हैं बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे की कार्यदाई संस्था यूपीडा हैं। इस एजेंसी ने केंद्र सरकार व राज्य सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर जहां 1 लाख 90 हजार पेड़ काट लिए है। वहीं एनजीटी व सुप्रीम कोर्ट के आदेश ताक पर रखकर बहती केन जलधारा को पुल बनाकर बांध रखा है।

एजेंसी के डिसप्ले बोर्ड पर आज्ञा से जिलाधिकारी बाँदा का हवाला दिया गया हैं। स्थानीय बाशिंदों व पर्यावरण कार्यकर्ताओं के मन मे बरबस यह सवाल उठता हैं कि यह विशेषाधिकार यूपीडा को क्या मुख्यमंत्री योगी जी के आदेश पर मिला है ? या राज्य सरकार केंद्र को गुमराह करके यह पुल आवागमन के लिए बनाया गया हैं ? मौरम माफियाओं के पुल पर फौरी कार्यवाही करने का माद्दा रखने वाले फिलहाल वक्त बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के इस स्पेशल परिवहन पुल पर पूरी तरह खामोश व चुप्पी लिए है। जनता के विकास को बनाया जाने वाला बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे जनता के पानी व पेयजलापूर्ति को बाधित करने की शर्त पर निर्मित हो तो फिर अतिश्योक्ति कैसी कि यहां मौरम ठेकेदार बेखौफ अवैध पुल कैसे बना लेते हैं ???

रिपोर्ट : आशीष सागर दीक्षित

About Author

admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page