हाल ही में बुंदेलखंड नवनिर्माण सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय तिवारी ने बाँदा आकर होटल राजगृह में प्रेसवार्ता की थी।

प्रेसवार्ता में खुद को राष्ट्रीय अध्यक्ष बतलाने वाले विनय तिवारी ने बाँदा इकाई की घोषणा की थी।

हमीरपुर ज़िला रहवासी विनय तिवारी बुंदेलखंड नवनिर्माण सेना बैनर से गाहे बगाहे पृथक बुंदेलखंड राज्य व बक्स्वाहा जंगल बचाओ अभियान को लेकर सक्रिय थे।

बाँदा में कभी संचालित कथित बुंदेलखंड नवनिर्माण सेना पुनः जीवित होकर सामने आई हैं। इसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि श्रीवास्तव हैं।

बाँदा। बुंदेलखंड पृथक राज्य आन्दोलनकर्मियों में लगातार वैचारिक विघटन की खेप में आज एक और घटनाक्रम घटित हुआ है। बुंदेलखंड नवनिर्माण सेना के खुद को राष्ट्रीय अध्यक्ष बतलाने वाले विनय तिवारी की सक्रियता से आहत होकर बाँदा में भी इसी नाम से एक अन्य संगठन जीवित हो गया हैं। विनय तिवारी हमीरपुर जनपद के रहवासी हैं। यह लगातार मीडिया के माध्यम से बुंदेलखंड राज्य गतिविधियों को संचालित कर रहे थे।

गौरतलब हैं कि बाँदा में कभी बुंदेलखंड नवनिर्माण सेना के नाम से रवि श्रीवास्तव संगठन चलाते थे। इधर अपनी व्यावसायिक जीवनशैली और साथियों की निष्क्रियता से यह संगठन हासिये पर चला गया था। यह कुछ वैसा था जैसे संघर्षरत बुंदेली पानी के बुलबुले से उत्पन्न बुंदेलखंड इंसाफ सेना के कर्ताधर्ता बादशाह सिंह का सियासी होकर संगठन की हत्या कर देना। वहीं बुंदेलखंड में बढ़ती बेरोजगारी के बीच युवाओं के अंदर सुर्खियों में बने रहे की ललक ने तमाम नए संगठन खड़े किए।

उल्लेखनीय हैं यदि बुनयादी सर्वेक्षण करेंगे तो किसी भी संगठन की ज़मीन मजबूत नहीं हैं। कुछ रचनात्मक लेकिन खबर तक सीमित कार्यक्रम से बुंदेलखंड राज्य की मांग को जीवित बनाये रखने की उम्मीद ने यह काम और तेजी से किये है। हलात यह हैं कि एक भी संगठन पृथक बुंदेलखंड राज्य को वैचारिक से रक्त क्रांति तक नहीं ले जा सकता हैं। यह अलग बात है यहाँ एक संगठन लगातार सात बार प्रधानमंत्री को रक्त से पत्र लिखने का दावा करता हैं। उधर बुंदेलखंड राष्ट्र समिति नाम से अन्य संगठन हैं। झांसी में बुंदेलखंड मुक्तिमोर्चा गठित हैं। यह कभी स्वर्गीय शंकरलाल मेहरोत्रा के विचारों पर गतिशील था लेकिन आज कुछ मुट्ठी भर राजनीतिक व शैक्षणिक मठाधीशों के इर्दगिर्द सिमट चुका है।

बड़ी बात यह हैं कि बुंदेलखंड नवनिर्माण सेना के दो धड़े होने से जहां संगठन में आंतरिक संघर्ष की स्थिति पैदा होगी वहीं पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग में बलवती होने का दावा करने वाला यह संगठन कटघरे में खड़ा होगा। आज बाँदा में रवि श्रीवास्तव की अगुवाई में मृत संगठन पुनः ज़िंदा हुआ है।

इनका दावा हैं कि विनय तिवारी कभी उनके संगठन में हमीरपुर जिलाध्यक्ष हुआ करते थे। साज़िशसन इन्होंने संगठन के नाम और बैनर पर कब्जा कर लिया है। आज रवि श्रीवास्तव ने बाँदा इकाई की घोषणा के साथ सात जनपद में जिलाध्यक्ष तय कर लेने की बात प्रेस विज्ञप्ति में लिखी हैं। वहीं बाँदा के नवोदित शायर,सपा पार्टी में राजनीतिक झुकाव व पत्रकारिता करने वाले नजरे आलम को राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया है।

वहीं आज जीवित हुए संगठन में भूपेंद्र सिंह गौतम राष्ट्रीय महासचिव बनाये गए है। देखना यह होगा कि पृथक बुंदेलखंड राज्य की भेड़चाल में तमाम बैनर किस गतिशीलता से मुद्दे को गर्माकर सरकार से बुंदेलखंड राज्य वापस लेते है। वहीं सत्तारूढ़ बीजेपी ने यूपी और मध्यप्रदेश में राज्य सरकार होने के बावजूद केंद्र की मोदी सरकार के पास बुंदेलखंड राज्य का मसौदा नहीं भेजा हैं।

यह खुलासा बाँदा के सूचनाधिकार कार्यकर्ता कुलदीप शुक्ला की आरटीआई से दो बार हो चुका है। फिलहाल वक्त मौजूदा केंद्र व राज्य सरकार तेरह ज़िलों वाले अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग पर शुसुप्त अवस्था मे नजर आ रही हैं। सवाल यह कि यह संगठन हठधर्मी सत्ता को कैसे किस रणनीति से झुकाते हैं यह उत्तर मिलना लाजमी हैं।

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Sumit Upadhyay

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