बर्खास्त सहायक उपायुक्त ने कहा, हाईकोर्ट से बरी होने के बाद भी पुलिस ने किया गिरफ्तार

आरोपी ने गिरफ्तारी के पीछे सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी का हाथ बताया।

सत्तारूढ़ विधायक के चहेतों को नहीं दी ज़मीन तो गिरफ्तारी वहीं बीजेपी नेता अजीत गुप्ता व दो अन्य को बेच दी सरकारी नजूल ज़मीन।

बाँदा ज़िला औद्योगिक ग्रामीण आस्थान की 8.86 एकड़ जमीन पर भूमाफ़ियागिरी से उद्योग स्थापित करने के नाम पर रसूखदारों का अवैध कब्जा।

स्थानीय समाचार पत्र प्रकाशन दफ्तरों के संचालक बन गए भूखण्डों के मालिक,उद्योग की आड़ में ज़मीन पर स्थाई रहवास।

बांदा। उद्योग विभाग बांदा में पूर्व सहायक उपायुक्त सर्वेश कुमार दीक्षित ने कहा कि पुलिस ने मुझे जिन आरोपों में गिरफ्तार किया है। उसमें हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मुझे बरी कर दिया था। अपनी गिरफ्तारी के पीछे बांदा के सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी का हाथ बताया और कहा कि उन्होंने गलत कार्यों के लिए मुझ पर दबाव बनाया, दबाव न मानने पर मुझे झूठे केसों में फंसाया गया।

पूर्व सहायक उपायुक्त को पुलिस ने सोमवार की रात 10 बजे रोडवेज बस स्टैंड से गिरफ्तार होना दर्शाया है। इस बारे में कोतवाली नगर प्रभारी योगेंद्र सिंह ने बताया कि कोर्ट स्टे से बहाली होने पर वह लखनऊ से बांदा जॉइनिंग में आया था। तभी बस स्टैंड से गिरफ्तार कर लिया गया। जबकि सर्वेश कुमार दीक्षित ने बताया कि उन्हें सोमवार को सवेरे लखनऊ स्थित आवास से गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि मेरे ऊपर जो आरोप लगाए गए हैं उस पर याचिका संख्या 1610 के तहत सुनवाई में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मुझे न सिर्फ बरी किया है बल्कि नौकरी में भी बहाल कर दिया है।

Banda's former assistant deputy commissioner Sarvesh Dixit arrested

उन्होंने बताया कि पुलिस लाइन में ज़िला औद्योगिक आस्थान पर लालवानी का प्लाट बीजेपी सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी बाँदा के व्यापार मंडल व भाजपा में अपने करीबी नेता संतोष कुमार गुप्ता (मुक्तिधाम समिति के खासमखास) को दिलाने की कवायद में थे। बकौल सर्वेश कुमार दीक्षित मैंने यह भूखंड संतोष गुप्ता के नाम करने से इंकार कर दिया था। सदर विधायक ने इस पर मेरे ऊपर दबाव बनाने का प्रयास किया। विधायक प्रकाश द्विवेदी के मन की जब नहीं की गई तो इन्होंने मुझे घर पर बुलाकर जूते से पीटा था। इससे आहत होकर मैं स्थांतरण कराकर बाँदा से चला गया था।

वहीं अपने साथ हुई घटना की जानकारी अपने उच्चाधिकारियों को दी थी। पुलिस लाइन स्थित ज़िला उद्योग विभाग के भूखंडों को बेचने के आरोप को खारिज करते हुए आरोपी सहायक उपायुक्त सर्वेश दीक्षित ने कहा कि मेरे पास इस तरह के कोई विधिक अधिकार नहीं हैं जिससे मैं भूखंड बेच सकूं। यह सारे आरोप गलत है और न्यायालय ने भी इस पर मुझे क्लीन चिट दे दी है। गौरतलब हैं सर्वेश दीक्षित पर एक अन्य बीजेपी नेता अजीत गुप्ता सहित दो अन्य पर भूखंड बेचने का आरोप लगा है। बतलाते चले कि बाँदा पुलिस ने सर्वेश दीक्षित को उपायुक्त जहीरूद्दीन की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार किया है। इस तहरीर के मुताबिक वर्ष 2017-18 में सहायक उपायुक्त सर्वेश दीक्षित पुत्र कमल कांत दीक्षित निवासी जनपद लखीमपुर खीरी द्वारा 50 हजार वर्ग फिट रिक्त पड़ी भूमि को फर्जी तरीके से अपने पक्ष में पत्र तथा शपथ पत्र बनाकर उपायुक्त रामविलास बाजपेई के फर्जी तरीके से हस्ताक्षर कर व उपायुक्त उद्योग की मोहर लगाकर भूखंडों को अवैध तरीके से बेचने का मामला था।

Banda's former assistant deputy commissioner Sarvesh Dixit arrested

उल्लेखनीय हैं ग्रामीण औद्योगिक आस्थान पुलिस लाइन मार्ग की कुल भूमि सूचना अधिकार पत्र संख्या 199/जि.उ.के.(बाँ0)/2015-16 दिनांक 15 अक्टूबर के मुताबिक 8.86 एकड़ हैं। यह मुकदमा 15 जून 2021 को नगर कोतवाली में दर्ज कराया गया था। इस मामले में धारा 420, 467,468 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके अलावा धारा 409 कोतवाली नगर 386, 504, 506 थाना गिंरवा व कोतवाली में 66 व 67 आईटी एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत है। जिस पर उनकी गिरफ्तारी की गई है।

क्या था पूरा मामला
उद्योग केंद्र कार्यालय में सहायक उपायुक्त पद पर तैनात सर्वेश कुमार दीक्षित ने उद्योग केंद्र की लगभग 50 हजार वर्ग फिट जमीन की फर्जी दस्तखत व मुहर से अपने पक्ष में रजिस्ट्री कर ली। शासन की ओर से कराई गई जांच के बाद उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। उपायुक्त ने कोतवाली नगर में धोखाधड़ी, जालसाजी की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज करा दी। दूसरी तरफ पूर्व सहायक आयुक्त ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री समेत सदर विधायक के खिलाफ अभद्र पोस्टें डालीं। आपत्तिजनक पोस्ट डालने पर सर्वेश कुमार दीक्षित के खिलाफ शहर कोतवाली और गिरवां थाने में एक-एक और रिपोर्ट दर्ज हो गयी।

Banda's former assistant deputy commissioner Sarvesh Dixit arrested

ग्रामीण औद्योगिक आस्थान बना भूमाफ़ियागिरी का गढ़
बाँदा पुलिस लाइन मार्ग पर स्थित ज़िला औद्योगिक ग्रामीण आस्थान सरकारी जमीन हथियाने का गढ़ हैं। यहां सहायक उपायुक्त सर्वेश दीक्षित के कारनामों से पूर्व भी कुल 8.86 एकड़ भूमि पर बेखौफ होकर उद्योग स्थापना केंद्र के नाम पर स्थाई आवास बनाये गए जबकि यह शासन की गाइडलाइंस के विपरीत कृत्य हैं। बड़ी बात है इसमें सत्तारूढ़ दल बीजेपी के नेता संतोष गुप्ता (व्यापार मंडल व मुक्तिधाम संस्था संचालक) से लेकर कुछ स्थानीय समाचार पत्रों के संपादक तक कब्जा किये है। यह उत्तरप्रदेश सरकार की जिला ग्रामीण औद्योगिक आस्थान नियमावली व एंटी भूमाफ़िया कानून का मखौल उड़ाने वाला कृत्य हैं।

विडम्बना यह हैं कि यही लोग सरकारी व सामाजिक जमात में सभ्रांत लोगों की दीर्घा में निर्लज्जता से सुशोभित हैं। क्या मुख्यमंत्री योगी की आंख में धूल झोंकने वाले इन महंतों पर कार्यवाही हो सकती हैं तब जब गरीबों के आशियाने प्रशासन उजाड़ने में कसर नहीं छोड़ता हैं। यह मामला सदर रजिस्ट्रार से लेकर प्रशासन तक को मालूम है। हास्यास्पद यह हैं कि यह अनाधिकृत अवैध कब्जे मण्डल आयुक्त कार्यालय के आसपास किये गए है। इससे इतर बाँदा में नजूल व सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्जे मसलन छत्रसाल संग्रहालय बिजलीखेड़ा मार्ग, सिविल लाइन पीला गिरजाघर ( सेंट जार्ज स्कूल मामला) खसरा नंबर 1012,डिवाइन मैरिज हाउस इंद्रानगर रोड (नया चर्च नजूल ज़मीन),इंद्रानगर-आवास विकास ए-बी ब्लाक होते हुए श्रीनाथ विहार कनवारा माइनर से भरने वाली 5 किलोमीटर लंबी सिंचाई विभाग की नहर पर ताबड़तोड़ अवैध कब्जे करवाना बाँदा प्रशासन की बड़ी उपलब्धियों में शामिल है।

सवाल यह कि जिला ग्रामीण औद्योगिक आस्थान की कब्जे वाली ज़मीनों पर अवैध कब्जे व भूखंड बेचने के मामले पर गिरफ्तार सहायक उपायुक्त सर्वेश दीक्षित से लेकर उन भूमाफ़िया गुनाहगार पर कार्यवाही बाँदा डीएम व मण्डल आयुक्त ने क्यों नहीं की हैं ? वहीं सदर रजिस्ट्रार नजूल भूखण्डों की रजिस्ट्री करते हुए कैसे बचें हुए है ?

@आशीष सागर दीक्षित

About Author

admin

You cannot copy content of this page